मरवाही वनमंडल बिग ब्रेकिंग-भ्रष्टाचार के भूखे भेड़िए: गोबर घोटाले की मलाई के बाद कैम्पा के बजट पर भी खुला डाका 14 लाख 77 हज़ार गोबर घोटाले के आरोपी भूपेंद्र साहू और रेंजर रमेश खैरवार अब 8 लाख रुपये कैंपा घोटाले में दोषी,, नौकरी से सीधे बर्खास्त करने की अनुशंसा!
अफसरों के फर्जी दस्तखत और बाहर से अवैध रूप से बनवाई गई नकली मुहर

मरवाही वनमंडल में सरकारी खजाने को अपनी जागीर समझकर लूटने वाले सफेदपोश अपराधियों का सबसे घिनौना चेहरा सामने आ चुका है। पूर्व में हुए 14 लाख 77 हजार रुपये के बहुचर्चित गोबर घोटाले के मुख्य सूत्रधार और कैम्पा शाखा के शातिर बाबू भूपेन्द्र कुमार साहू तथा तत्कालीन रेंजर रमेश खैरवार की ‘भ्रष्ट जोड़ी’ ने अब वन संरक्षण के लिए आने वाले कैम्पा (CAMPA) मद के पैसों को भी पूरी तरह डकार लिया है। महज़ दो महीने पहले, मई 2026 में वित्तीय धोखाधड़ी के चलते सस्पेंड (निलंबित) किए जा चुके इन आदतन अपराधियों का पेट इतने से भी नहीं भरा था। उप वनमण्डलाधिकारी बिलासपुर की 17 पन्नों की जांच रिपोर्ट ने इनके इस नए और सुनियोजित महाघोटाले की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं
कागजी जादूगरी से ₹8.14 लाख पार, धरातल पर एक इंच काम

लिखित शिकायत पर बैठी उच्च स्तरीय जांच में इस दागी सिंडिकेट का एक और खौफनाक कारनामा उजागर हुआ है। इन दोनों भ्रष्टाचारियों ने मरवाही के घुसरिया, धरहर और चुवाबहरा परिसर के रोपण क्षेत्रों में वर्ष 2021-22 के दौरान फेंसिंग मरम्मत का केवल कागजी खेल रचा। मौके पर बिना एक इंच कटीला तार लगाए और बिना किसी वास्तविक मजदूर को काम दिए, आरोपियों ने 21 फर्जी वाउचर्स (क्रमांक M/140 से M/160) तैयार किए और सरकारी खजाने में सीधे सेंध लगाकर ₹8,14,778 (आठ लाख चौदह हजार सात सौ अठहत्तर रुपये) अपात्र लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर आपस में बंदरबांट कर ली।
अफसरों के फर्जी दस्तखत और बाहर से अवैध रूप से बनवाई गई नकली मुहर

इस नए घोटाले को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने किसी शातिर और पेशेवर अपराधी की तरह साजिश रची थी। जांच के दौरान जब बिलासपुर SDO ने तत्कालीन अफसरों को सामने बिठाया, तो तत्कालीन SDO संजय त्रिपाठी और सेवानिवृत्त रेंजर दरोगा सिंह मरावी ने अपने बयानों में साफ तौर पर कहा कि बिलों पर किए गए उनके हस्ताक्षर पूरी तरह नकली, फर्जी और कूटरचित हैं। वन विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए इस भ्रष्ट जोड़ी ने पेण्ड्रा कार्यालय की एक ‘डुप्लीकेट सील’ (जाली मुहर) बाहर से अवैध तरीके से बनवाई थी। लेकिन कंप्यूटर के नीचे प्रिंट होने वाले ऑटो-जनरेटेड ‘फूटर’ पाथ ने इनका भंडाफोड़ कर दिया, जिसमें प्रिंटिंग का वर्ष 2024 दर्ज था, जिससे साफ हो गया कि 2021 का फर्जी काम दिखाकर 2024 में सरकारी खजाना लूटा जा रहा था।
पाप का घड़ा फूटा: अब केवल सस्पेंशन नहीं, सीधे नौकरी से बर्खास्त करने और जेल भेजने की तैयारी

14.77 लाख रुपये के गोबर घोटाले के दाग के बाद कैम्पा फंड की इस खुली लूट और एक दिव्यांग (विकलांग) दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी को डरा-धमकाकर रिकॉर्ड बदलने के घिनौने कृत्य ने वन विभाग की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है। मामले की गंभीरता और इन दोनों की आदतन आपराधिक प्रवृत्ति को देखते हुए जांच अधिकारी ने बिलासपुर के मुख्य वन संरक्षक को सौंपी रिपोर्ट में अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है।
रिपोर्ट में बहुत सख्त लहजे में अनुशंसा की गई है कि रेंजर रमेश खैरवार और बाबू भूपेन्द्र साहू को अब केवल सस्पेंड रखने का कोई औचित्य नहीं है, बल्कि इनके कृत्य को अक्षम्य मानते हुए इन्हें सीधे सरकारी नौकरी से बर्खास्त (Dismiss) किया जाए। इसके साथ ही जाली दस्तावेज बनाने और नकली सरकारी सील का उपयोग करने के संगीन जुर्म में दोनों के खिलाफ तत्काल नामजद FIR दर्ज कर जेल भेजने और लूटी गई पूरी राशि इन दोनों की निजी संपत्तियों को कुर्क करके वसूलने की अंतिम सिफारिश की गई है।









